Overspeed 150 की रफ्तार में बना रहा था वीडियो, सामने आई 65 वर्षीय महिला तो उड़ा दिया
इंस्टाग्राम पर 'फेमस' होने के चक्कर में एक परिवार की खुशियां खा गया समीर खान

Overspeed/गुरुग्राम का खौफनाक हादसा: 150 की रफ्तार, इंस्टाग्राम की रील और एक मां की ‘रियल’ मौत
गुरुग्राम (गैरतपुर बास): एक तरफ मोबाइल का कैमरा ऑन था, स्पीडोमीटर की सुई 150 KM/H को पार कर रही थी और युवक का पूरा ध्यान सड़क पर नहीं, बल्कि स्क्रीन पर मिलने वाले ‘लाइक्स’ पर था। तभी सामने से एक बुजुर्ग महिला आई, और पल भर में सब खत्म हो गया। यह कोई हादसा नहीं, बल्कि उस ‘रील संस्कृति’ का नतीजा है जिसने युवाओं के दिमाग में जहर भर दिया है।
घटना की रोंगटे खड़े कर देने वाली जानकारी:
स्थान: बादशाहपुर का गैरतपुर बास इलाका।
पीड़िता: 65 वर्षीय भतेरी देवी, जो अपने घर के पास सड़क किनारे खड़ी थीं।
आरोपी: समीर खान, जो उसी गांव का रहने वाला है और रील बनाने का शौकीन है।
150 की स्पीड… और फिर मौत का सन्नाटा
चश्मदीदों के मुताबिक, कार की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि समीर उसे संभाल ही नहीं पाया। आरोपी समीर को अपनी कार की रफ्तार के वीडियो इंस्टाग्राम पर डालने का जुनून सवार था। वह अपनी स्विफ्ट कार को मौत की मशीन बनाकर गांव की सड़कों पर दौड़ा रहा था। जैसे ही भतेरी देवी कार के सामने आईं, तेज रफ्तार के कारण ब्रेक लगाना नामुमकिन था।टक्कर इतनी भीषण थी कि महिला के शरीर के परखच्चे उड़ गए और वह कई फीट दूर जाकर गिरीं। आज घर के उस कोने में सन्नाटा है जहाँ मां की आवाज गूंजती थी। बेटा इंसाफ मांग रहा है और पति की आंखों के आंसू सूख चुके हैं।
रील बनाने की सनक और 150 की रफ्तार
जांच में जो सामने आया वह दिल दहला देने वाला है। आरोपी समीर खान को सड़कों पर रफ्तार का कहर बरपाने और उसके वीडियो इंस्टाग्राम पर डालने का जुनून था।

सोशल मीडिया का जहर: समीर के अकाउंट पर ऐसी कई वीडियो मिलीं जहां सुई 150 किमी/घंटा को पार कर रही थी।
दिखावे की आग: महज कुछ लाइक्स और व्यूज के लिए उसने सार्वजनिक सड़कों को ‘रेस ट्रैक’ बना दिया था।
अधूरी ट्रेनिंग, पूरा गुरूर: पुलिस के अनुसार समीर के पास मात्र एक लर्नर लाइसेंस था, फिर भी उसका दुस्साहस इतना था कि वह बेकाबू रफ्तार से कार चलाता था।
समाज के लिए एक कड़वा सवाल
आज भतेरी देवी के घर में मातम है। उनके पति की आंखें पथरा गई हैं और गांव में सन्नाटा है। लेकिन सवाल यह है कि इस मौत का जिम्मेदार कौन है?
क्या सिर्फ वह समीर खान, जो अब अस्पताल के बिस्तर पर अपनी गलती भुगत रहा है?
क्या वे माता-पिता नहीं, जिन्होंने बिना पूरी ट्रेनिंग और लाइसेंस के अपने बच्चे के हाथ में ‘मौत का यह यंत्र’ थमा दिया?
क्या वह सोशल मीडिया संस्कृति नहीं, जो जान जोखिम में डालने वाले स्टंट्स को ‘कूल’ बताती है?
पुलिस की कार्रवाई और कानून का शिकंजा
बादशाहपुर थाना पुलिस ने आरोपी समीर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की सख्त धाराओं (281 और 106) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। लेकिन क्या कोई भी कानून उस बेटे को उसकी मां वापस दे पाएगा? या उस पति के अकेलेपन को भर पाएगा?
एक अपील: सड़क पर आपकी कार की रफ्तार आपकी बहादुरी नहीं, बल्कि आपकी संवेदनहीनता दर्शाती है। याद रखें, घर पर कोई आपका इंतजार कर रहा है, और सड़क पर चलने वाले दूसरे व्यक्ति का भी अपना एक परिवार है। अपनी ‘रील्स’ के लिए किसी की ‘रियल’ जिंदगी मत छीनिए।












